हमरे उर ऊपर हाथ धरो जिनि प्यारे !!
काल्हि करार कियो सेजिया पर झुलनी वनी सकारे !
सो विसराय दिहो तुम बालम,अब नाहक हाथ पसारे !!धरो !!१
कंठ हार हुवेल विजायठ भूषन धरो लिलारे !
यह गहना हमका नहिं भावत इत से उठि जाव दुवारे !धरो !!२
यह जोवना हम बड़े जतन से पाला प्राण पियारे !
सो तुम्हें मलत दरद नहिं आवत ,मोरे कोमल अंग विगारे !धरो !!३
फरक रहो गले वाह न डारो न छुवो वदन हमारे !
द्विज छोटकुन झुलनी विन बालम ,मुख चूमे कौन प्रकारे !धरो !!४