फागुन बीत जात नहिं आये नन्द लाला !
प्रेम बढ़ाय फसाय मिलो मन विहँसि मोहनी डाला !!
नहिं विसरत वह सुरति संवलिया ,हरकत ऊर वन माला !!नहिं !!१
मिलि हो वेग चलत को वेरिया कहि गये वैन रसाला !
तलिफ तलिफ जिय जात गयो ,परी वेदरदी से पाला !!नहिं !!२
चहुँ दिशि घूम धाम होरी की सुनत लगत जस भाला !
अब कइसे जिय राखे दइया ,विरहिन वृज की वाला !!नहिं !!३
बनत न और उपाय हाय अब पीजै विष की प्याला !
रंगपाल सुधि लेत न अजहुँ ,निठुर मुरलिया वाला !!नहिं !!४