जटा अरण्य रूद्र से, प्रवाह गंग धार है, पवित्र नील कंठ में, विशाल सर्प हार है। डमड डमड नाद पर, रूद्र रौद्र नाचते, शिव शिवत्व दें सदा, शिव से पुकार है॥ जटा-जूट के कुंज से, तरंग गंग शोभति, शिव के दिव्य भाल पर, सुरसरि विराजती। धधक रही ज्वाल भाल, बाल चन्द्र राजते, महाकाल के चरणों में, हम अनुराग मांगते॥ दिगम्बराय दिव्य तेज़, भस्म अंग सोहते, जटा कलाप मध्य चन्द्र, देव मन मोहते। गले विशाल मुण्डमाल, शेष नाग संग है, त्रिशूल धारि व्योम रूप, भक्ति उमंग है॥ पगों की थाप से धरा, डगमग डगमग डोलती, पुकार हर हर महादेव, कण्ठ कण्ठ बोलती। त्रिनेत्र ज्वाल जागती, कलि-कपट के काल को, प्रचण्ड रूप धारते, रक्षित सकल संसार को॥ कराल भाल पावका, धधध-धधक ज्वाल है, प्रचण्ड मुण्ड मालिका, थिरकती डमड ताल है। धिमिद्धिमिद्धिमिन् ध्वनन, गूँजता मृदंग है, शिवत्व के प्रकाश में, मिटा सभी विषाद है॥ नवीन मेघ मण्डली, घिरी घिरी घिरी खड़ी, अंधेरी रात में छटा, बिखरी बड़ी बड़ी। गले में लिपटा भुजंग, फूफ फूफ फूंकता, काल के काल का, ब्रह्माण्ड शीश झूकता॥ कराल भाल पट्टिका, धधक रही है अग्नि सी, विशाल कण्ठ धारिणी, जो गंग है प्रवहती। कपाल माला क...
भदावर के लोकगीतों में चंबल की माटी की सौंधी-सौंधी गंध महकती है। जन मानस ने इन गीतों को गाते-गाते विविध रूप प्रदान किए हैं। लाखों कंठों ने गा-गा कर और लाखों लोगों ने मुग्ध होकर सुन-सुन कर इन गीतों को परम शक्तिशाली और हृदयस्पर्शी बना दिया है। लोकगीतों में धरती गाती है, पर्वत गाते हैं, नदियां गाती हैं, फसलें गाती हैं होली के भजन लिरिक्स, होली के रसिया लिरिक्स, होली गीत लिरिक्स इन हिंदी, होली लोक गीत इन हिंदी लिरिक्स, होली गीत लिरिक्स, लिरिक्स होली के भजन, लिरिक्स होली भजन, होली भजन डायरी,