"जब-जब जीवन में भय, संकट और अंधकार घिर आता है…
तब आदिशक्ति माँ दुर्गा का कवच, भक्तों की रक्षा करता है।
यह केवल शब्द नहीं… यह दिव्य ऊर्जा है,
जो तन, मन और आत्मा को सुरक्षा प्रदान करती है।
ऋषियों ने जिसे गुप्त रखा, ब्रह्मा ने जिसे प्रकट किया…
वही पावन ‘देवी कवच’ आज आपके समक्ष है।
श्रद्धा से सुनिए… और माँ की कृपा को अनुभव कीजिए…"
जय अम्बे जगदम्बे माता,
रक्षा कर तू दिन और राता॥
तेरा कवच जो हृदय बसावे,
भय-संकट सब दूर भगावे॥
[Verse 1 – Soft Devotional]
गुप्त रहस्य सुनाऊँ माता,
ब्रह्मा बोले मुनि से ज्ञाता।
सर्वरक्षा करने वाला,
देवी कवच बड़ा निराला॥
[Verse 2 – Build]
शैलपुत्री प्रथम भवानी,
ब्रह्मचारिणी रूप उजियारी।
चन्द्रघण्टा मधुर झंकारे,
कूष्माण्डा जग सृष्टि सँवारे॥
[Verse 3 – Stronger Energy]
स्कन्दमाता ममता धारी,
कात्यायनी संकट हारी।
कालरात्रि भय हर लेती,
महागौरी शांति देती॥
[Chorus Repeat – Bigger]
जय अम्बे जगदम्बे माता,
रक्षा कर तू दिन और राता॥
तेरा कवच जो हृदय बसावे,
भय-संकट सब दूर भगावे॥
[Verse 4 – Heroic]
सिद्धिदात्री वर बरसावे,
नवदुर्गा सब कष्ट मिटावे।
नाम तुम्हारे जो भी गावे,
सिद्धि-फल वो तुरंत पावे॥
[Verse 5 – Intense Protection]
अग्नि-ज्वाला या रण भारी,
तू ही माँ रक्षा करने वाली।
दुर्गम पथ हो या अँधियारा,
माँ तेरा ही एक सहारा॥
[Narration]
"ब्रह्मा जी ने आगे बताया की किस प्रकार
देवी अलग-अलग रूपों में अपने अलग वाहनों पर सवार हैं।"
[Music Build Transition]
[Female Vocals ]
[Verse 6 – Mystical]
चामुण्डा प्रेतों पे सवारी,
वाराही महिष पे भारी।
वैष्णवी गरुड़ पे आए,
माहेश्वरी वृषभ सजाए॥
[Verse 7 – Divine Grandeur]
कौमारी मयूर पे छाए,
ब्राह्मी हंस पे शोभा पाए।
नाना भूषण, रूप निराला,
देखे जग सारा मतवाला॥
[Bridge – Emotional Drop]
हे महाशक्ति! रक्षा करना,
शत्रु भय सब दूर ही करना।
तेरी कृपा जो पा जाता,
हर संकट से बच जाता॥
[Chorus – Grand]
जय अम्बे जगदम्बे माता,
रक्षा कर तू दिन और राता॥
तेरा कवच जो हृदय बसावे,
भय-संकट सब दूर भगावे॥
[Narration]
"ब्रह्मा जी ने बताया की देवी को हर दिशा में स्थापित किया गया है
आप जहाँ भी हों, आप के हर अंग की देवी रक्षा करती हैं।
ये आपका पूरा आध्यात्मिक सुरक्षा कवच है "
[Music Build Transition]
[Female Vocals ]
[Final Verses – Climax]
दसों दिशा में तू ही छाई,
हर ओर तेरी छवि समाई।
ऊपर नीचे रक्षा तू करना,
हर पल माँ तू संग ही रहना॥
आगे जया, विजया पीछे,
अजिता बाएँ, अजेया दाएँ।
माथे उमा, आँख त्रिनेत्री,
वाणी में बसती सरस्वती॥
हृदय में ललिता निवासे,
नाभि में शक्ति प्रकाशे।
अंग-अंग की रक्षा करती,
माँ हर दुख पीड़ा हरती॥
[Ultimate Climax]
मन-बुद्धि अहंकार बचावे,
प्राणों में जीवन भर जावे।
तन का कण-कण तू सँभाले,
जीवन को पावन कर डाले॥
यश-कीर्ति लक्ष्मी तू देवे,
परिवार सुख चैन से सेवे।
जहाँ न पहुँचे कवच तेरा,
वहाँ भी पहुँचे चरण तेरा॥
"माँ दुर्गा से यह प्रार्थना कि ..वे हमें हर जगह, ..हर समय और हर स्थिति में सुरक्षित रखें...
जय माता दी… "