सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Bhadawari Faag | मतवारि हो हे गई नारि मतवारि |

मतवारि हो हे गई नारि मतवारि मतवारि हो हे गई नारि मतवारि   होत प्रदर्शन रोज देश में , नारि बढ़ें अंगरी है   मोहे प्रगति कछु न दिखत , फैशन की भरमारि है   अंग - अंग खुल रहे देह के , अब नीचे सरकत सारि     मतवारि हो हे गई नारि मतवारि मतवारि हो हे गई नारि मतवारि   कोई घरे करे कछु काम काज न , नेतागिरि भारि है   कोई बालक बिलख रहे खटिंयन पै , आया ही महतारीं है   कोई इहाँ - उहाँ डोले गलियन मैं , अब बढ़ी वासना भारि   मतवारि हो हे गई नारि मतवारि मतवारि हो हे गई नारि मतवारि   कोई गर्भपात की करि छूट , संसद ने नीति बिगारी है   कोई वैश्यवृति को वैद्य करो , अब ये आवाज़ निकारि है   कोई कैसे होएँगी सती देश में , अब यही सोच मोहे भारि     मतवारि हो हे गई नारि मतवारि मतवारि हो हे गई नारि मतवारि कोई जितनी छूट मिली तिरियन को , उतनो ही व्यवचारा है   कोई कहें यदुवीर कह गए तुलसी , ...

Bhadawari Faag : मेला हो चल देखो बटेश्वर मेला | पारंपरिक होली लिरिक्स | देहाती होली गीत Lyrics

मेला हो चल देखो बटेश्वर मेला मेला हो चल देखो बटेश्वर मेला कोई खाड भरो बैलन पर दीखे, मीलन लो बछड़ा भारी कोई बदन-बाह में घोडा-गधह, खिच्चर की पाँतें नियरी कोई यहाँ उहाँ नरियन थरियन पै ऊठन को ठकठेला मेला हो चल देखो बटेश्वर मेला मेला हो चल देखो बटेश्वर मेला कोई भारी मंडी लगी हींग कहुँ चकिया चक्का अटूट धरे कोई कम्बर दरी विसरातिन कहूँ ईंगुर के ढेर भरे कोई कहुँ ठठेरे बेच रहे हैं लोटा थरिया बेला मेला हो चल देखो बटेश्वर मेला मेला हो चल देखो बटेश्वर मेला कोई साधु संत कहूँ एकठोरे कहूँ भिखमंगन के डेरा कोई लोग कहूँ सड़कन पै घूमें कहूं लुगाइन के घेरा कोई कहे यदुवीर भीड़ अति भारी, है रहो रेलमपेला मेला हो चल देखो बटेश्वर मेला मेला हो चल देखो बटेश्वर मेला कोई उलटी धार बहे जमुना की विसरातिन को घेरा है कोई सौ मंदिर जहाँ बने अनौखे, घण्टा शंख मज़ीरा है कोई बिटिया से लरका कर दीनों, शंकर जी को खेला मेला हो चल देखो बटेश्वर मेला मेला हो चल देखो बटेश्वर मेला कवि / लेखक - श्री यदुवीर सिंह भदौरिया गांव - शिवनगर कोरथ दोस्तों, कृपया सभी भाई मेरे इस चेनल को सब्सक्राइब करना न भूले और घन्टी को ज...

होली भजन : मैंने सब कारे आजमाए !

ऊधो मैंने सब कारे आजमाए। कारे केस जतन सों राखे, इतर फुलेल लगाए, वे कारे नहीं भए आपने, श्वेत रूप दरसाए ॥1॥ ऊधो मैंने सब कारे आजमाए। कोयल के सुत कागा पाले, हित सों नेह लगाए, वे कारे नहीं भए आपने, अपने कुल को धाए ॥2॥ ऊधो मैंने सब कारे आजमाए। कारे नाग पिटारिन पाले, हित सों दूध पिलाए, वे कारे नहीं भए आपने, दाँव पड़े डस खाए ॥3॥ ऊधो मैंने सब कारे आजमाए। कारे भ्रमर नेह सों राखे, न्योत पराग चखाए, वे कारे नहीं भए आपने, आन फूल पे धाए॥4॥ ऊधो मैंने सब कारे आजमाए। कारे कान्ह हिया में राखे, निसदिन लगन लगाए, वे कारे नहीं भए आपने, कुब्जा पे भरमाए ॥5॥ ऊधो मैंने सब कारे आजमाए। ------------- हमारे यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें :

Holi Faag Geet : दिगम्बर खेले मसाने में होरी !

खेले मसाने में होरी दिगम्बर खेले मसाने में होरी -२  भूत पिशाच बटोरी भूत पिचाश बटोरी दिगम्बर खेले मसाने में होरी खेले मसाने में होरी दिगम्बर खेले मसाने में होरी लखि सुन्दर फागुनी छटा को -२  मन से रंग गुलाल हटा दो -२  चिता भसम भरि झोरी हो चिता भसम भरि झोरी ! दिगम्बर खेले मसाने में होरी  खेले मसाने में होली दिगम्बर खेले मसाने में होरी  गोप न गोपी श्याम न राधा-२  ना कोई रोक ना कौनौ बाधा | ना साजन ना गोरी # ना साजन ना गोरी दिगम्बर खेले मसाने में होरी खेले मसाने में होरी दिगम्बर खेले मसाने में होरी नाचत गावत डमरूधारी-२  छोड़े सर्प गणन पिचकारी पी के प्रेत ढपोरी हो ! पी के प्रेत ढपोरी दिगम्बर खेले मसाने में होरी खेले मसाने में होली दिगम्बर खेले मसाने में होरी भूतनाथ की मंगल होरी-3 देख सिहाई बिरज की छोरी धन-धन नाथ अघोरी हो ! धन-धन नाथ अघोरी दिगम्बर खेले मसाने में होरी खेले मसाने होरी दिगम्बर खेले मसाने में होरी खेले मसाने में होरी दिगम्बर खेले मसाने में होरी - ५  Subscribe our youtube channel

चौताल : मोरा कौन हरे दुःख पीरा, बिना रघुवीरा,

मोरा कौन हरे दुःख पीरा, बिना रघुवीरा, लगे अषाढ़ उमड़ घन गरजे, सावन गरुण गंभीरा, अरे सावन गरुण गंभीरा, अरे हाँ सावन गरुण गंभीरा, उड़े गुलाल लाल भये बादर, सावन गरुण गंभीरा, अरे सावन गरुण गंभीरा , अरे हाँ सावन गरुण गंभीरा, भादवं बिजुरी तड़ा-तड़ तडके वै तो भरी आये चहुँ दिशि नीरा, बिना रघुवीरा, मोरा कौन हरे दुःख पीरा, बिना रघुवीरा, लगे कुआर उमड़ भये बरखा, कार्तिक निर्मल नीरा, अगहन ओस सतावन लागे, मोरा थर-थर काँपे शरीरा, बिना रघुवीरा, मोरा कौन हरे दुःख पीरा, बिना रघुवीरा, अरे पूस मास जड़ा जोर होत है,माघे मकर महीना, फागुन फगुआ चैत संग खेलें, वै तो केहि पर फेंके अबीरा, बिना रघुवीरा, मोरा कौन हरे दुःख पीरा,बिना रघुवीरा, चैत मास बन केशव फूलै, बैशाखे बन बेला, गोरे-गोरे बहिया आवार दार कंगना, बैशाखे बन बेला, छींटूदास जेठ कब लागिहै, वै तो आये मिले रघुवीरा, हरे दुःख पीरा  ----------------------- देहाती होली गीत लिरिक्स के लिए हमारे यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें