उचारी हो, दुर्योधन गिरह उचारी
भईया कर्ण सुनो मेरी वाणी, सब विधि हार दिखाती हैं
मारे गए हजारों योद्धा, पेस नहीं अब जाती हैं
सोई भईया रे ! पांडव जय जयकार मनाये रहे
मर रही फौज हमारी हो, दुर्योधन गिरह उचारी
उचारी हो, दुर्योधन गिरह उचारी
ध्रुपद द्रोण जयद्रथ मारे गए, अब क्या भईया होना हैं
पाँचों पांडव अमन चैन में, हमको केवल रोना हैं
सोई भईया रे ! बड़ो भरोसो तेरे बल को
मोकु बिरन हजारी हो, दुर्योधन गिरह उचारी
उचारी हो, दुर्योधन गिरह उचारी
हो चुपचाप खड़े क्यों भईया, सांची बात बताओ ना
तुम चाहो तो पांडव दल का, पल में खोज मिटाओ ना
सोई भईया रे! सदा तुम्हारे बलबुते पे
हमने गदा सम्हारि हो, दुर्योधन गिरह उचारी
उचारी हो, दुर्योधन गिरह उचारी
तुमसा और नहीं कोई योद्धा, दीखत है पांडव दल में
अर्जुन भीम की चली कहा, तुमसा नहीं और कोई बल में
सोई भईया रे ! क्षत्रिय पन कहाँ गओ तुम्हारो
अब क्यों हिम्मत हारी, दुर्योधन गिरह उचारी
उचारी हो, दुर्योधन गिरह उचारी
-------कर्ण का जवाब ------
बताऊँ हो, तोए सारो भेद बताऊँ।
पारथ के रथ हाँकन हारे, आप स्वयँ हैं रघुराई
इसीलिए तो विजय हो रही पांडव दल की है भाई
सोई भईया रे ! श्री कृष्ण सो मिले सारथि
रण कौशल दिखलाऊँ हो, तोए सारो भेद बताऊँ।
बताऊँ हो, तोए सारो भेद बताऊँ।
सुनकर वचन कहि दुर्योधन, शकुनि को बुलवाना हैं।
मामा हैं अति चतुर उन्हीसे सारा पता लगाना हैं
सोई भईया रे ! वही चुने सारथि मनको
तभी विजय में पाऊँ हो, तोए सारो भेद बताऊँ।
बताऊँ हो, तोए सारो भेद बताऊँ।
भेजो दूत बुलाये शकुनि, आदर से बैठारे हैं
श्री कृष्ण सो चुनो सारथि, खुरपति वचन सुनाये हैं
सोई भईया रे ! मामा हमें बताय देओ साँची
काये रथवान बनाऊँ हो, तोए सारो भेद बताऊँ।
बताऊँ हो, तोए सारो भेद बताऊँ।
शकुनि सलाह मिलाये कहि, दुर्योधन से यो वानी हैं
शल्य सारथि बने कर्ण के, जो बल में ना सानी हैं
सोई भईया रे ! उन जैसा नहीं कोई योद्धा
बेटा सत्य सुनाऊँ, तोए सारो भेद बताऊँ।
बताऊँ हो, तोए सारो भेद बताऊँ।