शिव शंकर दीनदयाला, महा वरदानी ।।
अंग विभूति लिए मृगछाला, जटा गंगा उर्जझानी ।
माथे उनके तिलक चंद्रमा हो ।
जाके तीन नयन जग जानी, महा वरदानी ।।
वाहन बैल त्रिशूल विराजत, कर नागिन लपटानी ।
भाँग धतूर वेल की पाती हो ।
भोला और जहर विष सानी, महा वरदानी ।।
शवेत वसन गर मुंडन माला, संग में गौरी भवानी ।
लिंग पूजा वर्त डमरू बजावत ।
तहाँ गावत बहु विधि बानी, महा वरदानी ।।
महा देव देवन के राजा, और गुनन की खानी ।
तुलसीदास चरनन पर मोहित ।
तहाँ गाल बजावै सुरतानी, महा वरदानी ।।
अंग विभूति लिए मृगछाला, जटा गंगा उर्जझानी ।
माथे उनके तिलक चंद्रमा हो ।
जाके तीन नयन जग जानी, महा वरदानी ।।
वाहन बैल त्रिशूल विराजत, कर नागिन लपटानी ।
भाँग धतूर वेल की पाती हो ।
भोला और जहर विष सानी, महा वरदानी ।।
शवेत वसन गर मुंडन माला, संग में गौरी भवानी ।
लिंग पूजा वर्त डमरू बजावत ।
तहाँ गावत बहु विधि बानी, महा वरदानी ।।
महा देव देवन के राजा, और गुनन की खानी ।
तुलसीदास चरनन पर मोहित ।
तहाँ गाल बजावै सुरतानी, महा वरदानी ।।