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जनवरी, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

महाभारत फाग - कुंती कर्ण संवाद | होली गीत लिरिक्स

आई हो, जिह पास कर्ण के आई।  कुंती को लख गिरो चरण में, आसन पर बिठाई हैं।   आना हुआ कहो माँ कैसे, कर्ण ने गिराह सुनाई हैं।  सोई भईया रे ! तन मन में ये उदासी कैसी।  दीजो भेद बताई हो, जिह पास कर्ण के आई।  आई हो, जिह पास कर्ण के आई।  कुंती तबही कर्ण से बोली कहने में सकुचाती हूँ अब तक तेरा भेद छुपाया बेटा तुझे बतलाती हूँ  सोई भईया रे ! नौ महीना तोहे रखो गर्भ में  ओ बेटा बलदाई हो, जिह पास कर्ण के आई।  आई हो, जिह पास कर्ण के आई।  मैं तेरी मात पुत्र तू मेरा, मैंने यह अपराध कियो। जनमत बनी अभागिन बेटा तेरे संग में दगा कियो। सोई भईया रे ! लोकलाज के भय से मैंने। अनरथ लियो कमाई हो, जिह पास कर्ण के आई।  आई हो, जिह पास कर्ण के आई।  कुंत भोज सुता पिता को, मैं बेटा थी अति प्यारी।  करि तपस्या बालापन में, जब बेटा मैं थी कुँवारी।  सोई भईया रे ! विश्वामित्र मुनि ने हमको  दिए मंत्र बताई हो, जिह पास कर्ण के आई।  आई हो, जिह पास कर्ण के आई।  आजमाए जब मंत्र लाला तो, गजब भओ अति भारी है।  सूर्य देव भए प्रकट नजर जब मेरे ऊप...

महाभारत फाग : कृष्णा कुंती संवाद

( जब कृष्ण को कर्ण की अर्जुन को मारने की प्रतिज्ञा की खबर लगी ) पाई हो, यह खबर कृष्ण सुन पाई।  माधव कियो विचार अगर, कल अर्जुन मारा जायेगा।  द्रोपदी को मैंने दिया वचन, जो वह झूठा हो जायेगा।  सोई भईया रे ! धर्मराज कों भेद बतायो।  कुंती लयी बुलाई हो, यह खबर कृष्ण सुन पाई।  पाई हो, यह खबर कृष्ण सुन पाई।  श्री कृष्ण कुंती से बोले, बुआ सुनो हमारी है।  ब्रह्ममहूर्त में जाओ कर्ण ढिंग मुश्किल अटकी भारी है।  सोई भईया रे ! पाँचो बाण लेओ माँग दान में।  तो पारथ बच जाई हो, यह खबर कृष्ण सुन पाई।  पाई हो, यह खबर कृष्ण सुन पाई।  सुनके वचन कृष्ण के चल दई, भारी चिन्ता छाई है।  करती पश्चाताप जाये रही, नीर नैन भर लाई है।  सोई भईया रे ! प्यार मात को दे न सकी मैं।  गँगा दियो बहाई हो, यह खबर कृष्ण सुन पाई।  पाई हो, यह खबर कृष्ण सुन पाई।  मेरे जैसी मात अभागिन, कुंवारे कर्ण कुंवर जायो।  जब से बिछड़ो कुंवर हमारो, तबसे मुख नाय दिखलाओ  सोई भईया रे ! तरह तरह के सोच उठ रहे  नैनन नीर बहाई हो, यह खबर कृष्ण सुन पाई।  पाई ह...

महाभारत फाग - कर्ण की प्रतिज्ञा

(महाभारत युद्ध में हार हो रही थी, दुर्योधन को दुखी देख कर्ण ने प्रतिज्ञा ली ) मारूँ हो, रण में पारथ को मारूँ। अटल प्रतिज्ञा भूप हमारी, चिंता मति करों मन में।   सुबह होत पारथ को मारूँ, जा करके रण खेतन में।  सोई भईया रे ! मार मार पाँडव दल को।  काट करब सी डारू हो, रण में पारथ को मारूँ। मारूँ हो, रण में पारथ को मारूँ। जो इतनो न करू विरन, तो सूर्य पुत्र नहि कहलाऊं।  अटल प्रतिज्ञा भूप हमारी, ज़िन्दा मुख ना दिखलाऊं।  सोई भईया रे ! पाँच वाण गुरू परुषराम के।  अपने कर में धारूँ हो, रण में पारथ को मारूँ। मारूँ हो, रण में पारथ को मारूँ। खाली वाण एक ना जावेँ, मेरे गुरू की शक्ति हैं।  विकट मार कौ झेले उनकी कौन शूर की हस्ति है।  सोई भईया रे ! शल्य  वीर बने सारथि।  कारज तेरो तारूँ हो, रण में पारथ को मारूँ। मारूँ हो, रण में पारथ को मारूँ। खुरपति को विश्वाश आये गाओ, मन की मिटी गिलानी है।  पारथ मरे काम बन जावै, खुशी भओ अभिमानी है।   सोई भईया रे ! खेतपाल सिंह कहे सभा में।  ध्यान प्रभु को धारू हो, रण में पारथ को मारूँ। मारूँ हो, रण मे...

महाभारत फाग - दुर्योधन कर्ण संवाद

उचारी हो, दुर्योधन गिरह उचारी  भईया कर्ण सुनो मेरी वाणी, सब विधि हार दिखाती हैं  मारे गए हजारों योद्धा, पेस नहीं अब जाती हैं  सोई भईया रे ! पांडव जय जयकार मनाये रहे  मर रही फौज हमारी हो, दुर्योधन गिरह उचारी  उचारी हो, दुर्योधन गिरह उचारी  ध्रुपद द्रोण जयद्रथ मारे गए, अब क्या भईया होना हैं  पाँचों पांडव अमन चैन में, हमको केवल रोना हैं  सोई भईया रे ! बड़ो भरोसो तेरे बल को  मोकु बिरन हजारी हो, दुर्योधन गिरह उचारी  उचारी हो, दुर्योधन गिरह उचारी  हो चुपचाप खड़े क्यों भईया, सांची बात बताओ ना  तुम चाहो तो पांडव दल का, पल में खोज मिटाओ ना  सोई भईया रे! सदा तुम्हारे बलबुते पे  हमने गदा सम्हारि हो, दुर्योधन गिरह उचारी  उचारी हो, दुर्योधन गिरह उचारी  तुमसा और नहीं कोई योद्धा, दीखत है पांडव दल में  अर्जुन भीम की चली कहा, तुमसा नहीं और कोई बल में  सोई भईया रे ! क्षत्रिय पन कहाँ गओ तुम्हारो  अब क्यों हिम्मत हारी, दुर्योधन गिरह उचारी  उचारी हो, दुर्योधन गिरह उचारी  -------कर्ण का जवाब ------ बताऊँ हो...

होली फाग : गणेश वंदना

मनाऊँ हो, हम प्रथम गणेश मनाऊँ।  गौरी पुत्र गणेश सदा तेरे, चरनन शीश नवाता हूँ।  सब देवों में देव बड़े हो, प्रथम ही तुम्हें मनाता हूँ।  सोई भईया रे ! आज सलामी गढ़पति प्यारे।  प्यारे ही गुण गाऊँ हो, हम प्रथम गणेश मनाऊँ।  मनाऊँ हो, हम प्रथम गणेश मनाऊँ।  लंबोदर गजबदन विनायक गणपति नाम तुम्हारे हैं।  टेर सुनो वरदायक स्वामी, हम आधीन तुम्हारे हैं।   सोई भईया रे ! सदा भरोसो हमको स्वामी।  बार बार सिर नाऊँ हो, हम प्रथम गणेश मनाऊँ।  मनाऊँ हो, हम प्रथम गणेश मनाऊँ।  एकदन्त तुम दयावन्त दीनों की विपदा टारि है।   माथे पर सिंदूर विराजे, मूसे की सवारी है।  सोई भईया रे ! वनफूल व धुप चढ़ाते।  आरती दीप जलाऊँ हो, हम प्रथम गणेश मनाऊँ।  मनाऊँ हो, हम प्रथम गणेश मनाऊँ।  फल-मेवा  लौंग-सुपारी गणपति तुम्हें सुहाते हैं।  सेवा सदा संतजन करते लडुअन भोग लगते हैं। सोई भईया रे ! खेतपाल सिंह आज सभा में। सबको शीश नावऊँ हो, हम प्रथम गणेश मनाऊँ। मनाऊँ हो, हम प्रथम गणेश मनाऊँ।