दीनन के दीनानाथ, सुने मैंने भक्तन हितकारी। हिरणाकुस प्रह्लाद भक्त पै, चाबुक जब मारे, खंभ फार नरसिंह रूप धरि, नख सों काया फारे। दीनन के दीनानाथ, सुने मैंने भक्तन हितकारी। भरी सभा में नगन करैं, पांडव कुल की नारी, दुशासन की भुजा चीर , खेंचत-खेंचत हारी। दीनन के दीनानाथ, सुने मैंने भक्तन हितकारी। गज कूँ पकरि लियो गरह ने, जल को बल भारी, चक्र चलाय गरह सिर काटो, गज की विपदा टारी। दीनन के दीनानाथ, सुने मैंने भक्तन हितकारी।
भदावर के लोकगीतों में चंबल की माटी की सौंधी-सौंधी गंध महकती है। जन मानस ने इन गीतों को गाते-गाते विविध रूप प्रदान किए हैं। लाखों कंठों ने गा-गा कर और लाखों लोगों ने मुग्ध होकर सुन-सुन कर इन गीतों को परम शक्तिशाली और हृदयस्पर्शी बना दिया है। लोकगीतों में धरती गाती है, पर्वत गाते हैं, नदियां गाती हैं, फसलें गाती हैं होली के भजन लिरिक्स, होली के रसिया लिरिक्स, होली गीत लिरिक्स इन हिंदी, होली लोक गीत इन हिंदी लिरिक्स, होली गीत लिरिक्स, लिरिक्स होली के भजन, लिरिक्स होली भजन, होली भजन डायरी,