🌷🌷 सोहर गीत 🌷🌷 धन्य धन्य राज्य अयोध्या ,की धन्य राजा दशरथ रे ललना रे - धन्य रे कौशिल्या रानी के कोखीं की , रामजी जनम लेला रे । किनिका के भेलैन रामचंद्र, की किनिका के लछुमन रे ललना रे - किनिका के भेलैन भरत सत्रुघ्न चारु घर सोहर रे कौशिल्या के भेलैन रामचंद्र सुमिन्त्रा के लछुमन रे ललना रे - केकई के भेलैन भरत सत्रुघ्न चारु घर सोहर रे आबथु विप्र से पंडित , औरो पंडित सब रे ललना रे - गुणी देथु बौआ के राशि की कोने तिथि जन्म भेल रे एक हाथ लेलनि विप्र पोथी की , दोसरे मुरुछि खसु रे ललना रे - बारहे बरष राम होयत, जयता निकुंज वन रे एतबा वचन राजा सुनलनि, सुनहु ने पाओल रे ललना रे - गोर मुंख ओढ़ल चदरिया, की सुतल गज ऊपर रे सोइरी में बोले कौशिल्या रानी , की सुनु राजा दशरथ रे ललना रे - कतहु क राम मोरा जिवथु , हमरे कहाबथु रे।
भदावर के लोकगीतों में चंबल की माटी की सौंधी-सौंधी गंध महकती है। जन मानस ने इन गीतों को गाते-गाते विविध रूप प्रदान किए हैं। लाखों कंठों ने गा-गा कर और लाखों लोगों ने मुग्ध होकर सुन-सुन कर इन गीतों को परम शक्तिशाली और हृदयस्पर्शी बना दिया है। लोकगीतों में धरती गाती है, पर्वत गाते हैं, नदियां गाती हैं, फसलें गाती हैं होली के भजन लिरिक्स, होली के रसिया लिरिक्स, होली गीत लिरिक्स इन हिंदी, होली लोक गीत इन हिंदी लिरिक्स, होली गीत लिरिक्स, लिरिक्स होली के भजन, लिरिक्स होली भजन, होली भजन डायरी,